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[email protected] : शिक्षा सिर्फ ग्रंथों से नहीं आसपास से भी ग्रहण करनी चाहिए : डाॅ. संजय पासवान

 


शिक्षा सिर्फ ग्रंथों से नहीं आसपास से भी ग्रहण करनी चाहिए : डाॅ. संजय पासवान

जनजातीय को ब्रिटिश काल के बाद बांटने का प्रयास हुआ

नवादा लाइव नेटवर्क।

     पूर्व केन्द्रीय मंत्री रहे विधान पार्षद डाॅ. संजय पासवान ने जनजातीय आंदोलन पर चर्चा विकास की प्रक्रिया है। शिक्षा के लिए लोगों को सिर्फ ग्रंथों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, आसपास और समाज से भी ग्रहण करनी चाहिए। मुख्य अतिथि के तौर पर डाॅ. पासवान जनजातीय आंदोलन पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संवाद का माहौल उत्पन्न करना चाहिए। एकता के लिए कार्य आवश्यक है। समाज की एकात्मकता पर बल दिया। इतिहास निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हो रहा है।

भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा संपोषित राष्ट्रीय संगोष्ठी-‘भारत में जनजातीय एवं दलित आंदोलन के आयाम’ विषय पर इतिहास संकलन समिति बिहार प्रांत एवं इतिहास विभाग, काॅलेज आॅफ काॅमर्स, आर्टस एंड साइंस द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समीक्षा प्रतिवेदन डाॅ. रामाकांत शर्मा, स्वागत प्रो. डाॅ. राजेश शुक्ला, विशिष्ट संगोष्ठी का व्याख्यान प्रो जयदेव मिश्रा ने दिया। जबकि काॅलेज के प्राचार्य प्रो इंद्रजीत प्रसाद राय ने अध्यक्षीय भाषण दिया। प्रो शिवेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो अनिता ने किया।

ब्रिटिश काल के बाद जनजातीय को बांटने का प्रयास हुआ : डाॅ. सुधांशु झा

    दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय गया के सहायक प्रोफेसर डाॅ. सुधांषु कुमार झा ने संगोष्ठी व्याख्यान करते हुए कहा कि औपनिवेशिक काल से पूर्व जनजातीय स्वतंत्रता पर प्रहार नही हुआ, बल्कि ब्रिटिश काल के बाद उनपर आघात कर बांटने का प्रयास किया। शासन करने के लिए औपनिवेशिक सता ने विभाजनकारी प्रवृति को जन्म दिया। 1860 के बाद ट्राइव शब्दों की अत्यधिक व्याख्या होने लगी। 1921 के बाद जाति एवं धर्म के विभाजन नृजातीय आधार पर किया जाने लगा। जनजातीयों के विभाजन एक षड्यंत्र पूर्ण कृत्य था। हिंदुओं के विभाजन रिजले का षडयंत्र था। राजनैतिक एवं प्रशासनिक स्तर पर दलितों को हिंदूओं से अलग किया गया। डाॅ. आंबेडकर  का आंदोलन को दलित नजरिया से देखना भारतीय इतिहास परंपरा के लिए हानिप्रद है। उनका आंदोलन विकास एवं सामाजिक परंपरा के रूपांतरण का आंदोलन था।


डाॅ. राजीव अध्यक्ष और शैलेश  महासचिव निर्वाचित

    अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय महामंत्री डाॅ बालमुकुन्द पांडेय के निर्देशन में प्रो डाॅ जयदेव मिश्रा को चुनाव अधिकारी मनोनीत किया गया। बिहार इतिहास संकलन समिति के चुनाव में काॅलेज आॅफ काॅमर्स, आर्टस एंड साइंस के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो डाॅ राजीव रंजन को फिर से अध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। जबकि शैलेश  कुमार को महासचिव निर्वाचित किया गया है। इतिहास संकलन दक्षिण बिहार डाॅ सूर्यनारायण प्रसाद को कोष प्रमुख का दायित्व दिया गया है। इसके अलावा अन्य प्रकल्पों के संयोजक, सह संयोजक, कार्यकारिणी समिति और जिला संयोजक का चुनाव संपन्न हुआ।

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