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Nawada News : बिहार के शिक्षा मंत्री द्वारा श्रीरामचरितमानस को नफरत फैलानेवाला ग्रंथ बताना घोर निंदनीय : रत्नाकर



बिहार के शिक्षा मंत्री द्वारा श्रीरामचरितमानस को नफरत फैलानेवाला ग्रंथ बताना घोर निंदनीय : रत्नाकर

नवादा लाइव नेटवर्क।

बिहार प्रदेश के शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर ने श्री रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताया है। इससे बिहार समेत देश भर के बुद्धिजीवियों , साहित्यकारों एवं श्रीरामचरितमानस में आस्था रखने वालों द्वारा निंदा की जा रही है।

नवादा के हिन्दी मगही साहित्यकार रामरतन प्रसाद सिंह 'रत्नाकर' ने शिक्षा मंत्री द्वारा श्रीरामचरितमानस के प्रति दिए गए विवादित बयान की निंदा करते हुए कहा कि माननीय शिक्षा मंत्री जी सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए इसतरह का बयान दे रहे हैं। जिस समय 'अलख निरंजन' का नारा बुलंद हो रहा था लेकिन अलख कहीं लख नहीं रहे थे , उस कालखंड में श्रीरामचरितमानस महाकाव्य की रचना करके तुलसीदास ने परिवारिक जीवन में सदस्यों का दायित्व और राज्य का संचालन करने वालों के लिए रास्ता दिखाया था। श्रीरामचरितमानस परिवारिक प्रेम एवं सामाजिक सद्भाव का श्रेष्ठ महाकाव्य है।

 जासू राज प्रिय प्रजा दुखारी ,

सो नृप होहिं नरक अधिकारी ।

अर्थात जिस राजा के राज्य में प्रजा दुखी हो , वह राजा नरक का अधिकारी होता है। श्रीरामचरितमानस जैसा पवित्र ग्रंथ जिसके पाठकों की संख्या करोड़ों में है। दुनिया के किसी भी देश या किसी भी भाषा में इस तरह का साहित्य उपलब्ध नहीं है। इस प्रकार के विवादित बयान देने से पहले मंत्री जी को अभी खुद ही पढ़ने की आवश्यकता है। दूसरे को शिक्षा देने की स्थिति में मंत्री जी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी को सोचना चाहिए कि इस ढंग के वेसमय की शहनाई बजाने का यह समय नहीं है। कम से कम लोहिया वादी और जेपी के पद चिन्हों पर चलने वालों के लिए तो बिल्कुल ही नहीं। गौरतलब है कि बिहार के शिक्षा मंत्री ने नालंदा खुला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दो दिन पहले बुधवार को श्रीरामचरितमानस को समाज में नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताया था। इस बात को लेकर काफी बबाल मचा हुआ है।

 रिपोर्ट - चंद्रमौलि शर्मा।




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